प्रकाशक का अपने लेखकों के नाम खुला पत्र

प्रकाशक का अपने लेखकों के नाम खुला पत्र

 

सम्मानित लेखकगण,

आज से नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2024 प्रारंभ हो रहा है। स्वतंत्र प्रकाशन भी अपनी पुस्तकों के साथ मेले में शिरकत कर रहा है। कुछ ही महीने पहले शुरू हुआ यह प्रकाशन धीरे-धीरे आकार ले रहा है। हम राष्ट्रीय पुस्तक मेला, लखनऊ में अपनी  सिर्फ तीन पुस्तकों के साथ शामिल हुए थे लेकिन नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में हमारे पास प्रदर्शित करने के लिए 45 से अधिक पुस्तकें हैं। एक नए प्रकाशक पर आपने इतना भरोसा किया, इसके लिए मैं सदैव आपका ऋणी रहूँगा। हमने नि:शुल्क पुस्तक प्रकाशन योजना के तहत पचास पाण्डुलिपियों का चयन किया था। सभी पुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुछ किताबें टाइपसेटिंग या कवर डिजाइनिंग के स्टेज पर हैं। कुछ किताबें प्रूफरीडिंग के स्टेज पर हैं और अधिकांश किताबें प्रेस में भेज दी गई हैं। चयनित पाण्डुलिपियों में से 60% पुस्तकें प्रकाशित कर ली गई हैं। एक-एक करके सभी पुस्तकों का प्रकाशन होगा। आशा के विपरीत किताबों के प्रकाशन में समय कुछ ज्यादा लग रहा है। चयनित पाण्डुलिपियों की अंतिम सूची में शामिल एक भी पुस्तक ऐसी नहीं बचेगी, जो प्रकाशित करके बिक्री हेतु विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध न कराया जा सके।

आपका हम पर किया गया भरोसा ही हमारी ताकत है। जब हमने प्रकाशन की शुरुआत की,  तब देखते ही देखते एक ऐसा परिवार जुड़ गया, जो प्रतिपल गौरवान्वित और प्रेरित करता है। अनेक ऐसे नवांकुर रचनाकारों को हम प्रकाशित कर रहे हैं, जिनकी कृति पहले कभी प्रकाशित नहीं हुई है। कुछ ऐसे वरिष्ठ रचनाकारों की भी पुस्तकें प्रकाशित की जा रही हैं, जो जीवन के 75 सालों में पहली बार अपनी किताब प्रकाशित करवा रहे हैं। कुछ नामचीन स्थापित रचनाकारों ने प्रकाशन हेतु अपनी किताबें देकर स्वतंत्र प्रकाशन को मजबूती प्रदान करने और मुझे प्रोत्साहित होने का सुअवसर दिया है। एक रचनाकार के फोन कॉल से एक दिन मैं भावुक हो गया, जब उन्होंने यह कहा कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है और वे अपनी कृति अपनी आँखों से देख लेना चाहती हैं।

इसी तरह उत्साहित करने वाले अनेक मौके आप सबने मुझे दिये। एक ओर अपनी पुस्तकों की निर्माण प्रक्रिया से रचनाकार प्रसन्न दिखे, तो दूसरी ओर कुछ ऐसे रचनाकार भी हैं, जिनकी आशाओं पर हम संभवतः खरे उतरने से चूक गए और उन्हें पुस्तक प्रकाशन की धीमी रफ्तार  को लेकर कुछ नाराज़गी भी हुई। हालाँकि प्रकाशन को आरंभ हुए अभी आधा वर्ष भी नहीं बीता है और हमलोग दिन-रात काम ही कर रहे हैं। खैर...परिवार में यह सब चलता रहता है परन्तु आपको मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि जब एक बार आपकी पाण्डुलिपि  चयनित हो गई है, तो उसे प्रकाशित होकर वृहद पाठक जगत तक पहुँचने से कोई रोक नहीं पाएगा। आप सब की किताबें मेले के दौरान या मेले के बाद अवश्य प्रकाशित होगी। मैं इस वचनबद्धता को भी दोहराता हूँ  कि मेरी ओर से कभी किसी तरह की संवादहीनता अथवा अप्रत्याशित व्यवहार आपको देखने को नहीं मिलेगा। मैं आधी-आधी रात को भी आपके मैसेज का जवाब भेजता हूँ। चाहे आवरण पसंद करने की बात हो या प्रकाशन से जुड़ी छोटी-छोटी बारीकियाँ, मैं आपकी सलाह लेकर ही आगे बढ़ता हूँ। स्वतंत्र प्रकाशन अपने इसी मिशन पर परिवार के लेखकों के लिए उच्च गुणवत्ता की पुस्तकों को किफ़ायती मूल्य पर अथवा नि:शुल्क प्रकाशित व वितरित करने के लिए अनवरत प्रयासरत रहेगा।

आशा है कि एक प्रकाशक की परिस्थितियों को आप बेहतर समझ सकेंगे। परिवार सबके साथ और विश्वास से भी मजबूत बनता है। साथ बनाए रखियेगा।

और हाँ...दिल्ली या आसपास हों, तो प्रगति मैदान में आज यानी 10 फरवरी 2024 से शुरू हो रहे और 18 फरवरी तक चलने वाले विश्व पुस्तक मेले में स्वतंत्र प्रकाशन के स्टॉल संख्या P-3, (हॉल-2) पर अवश्य पधारें।

आप सबका हार्दिक आभार।

सुशील स्वतंत्र

संस्थापक,

स्वतंत्र प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली

Back to blog