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Swatantra Prakashan Pvt. Ltd.

Bahar Se Hi Laut Gaye by Gulancho Kumar - PAPERBACK

Bahar Se Hi Laut Gaye by Gulancho Kumar - PAPERBACK

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SKU:ISBN - 9789359867885

Regular price Rs. 299.00
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अपनी माटी में विलक्षण शक्ति होती है। इसकी सौंधी गंध में अद्वितीय चुम्बकत्व होता है। ललाट पर सज जाए तो यही माटी स्वाभिमान की आभा से दमकने लगती है। माय, माटी, टोला, भाषा, जंगल, नदी, झरना, पहाड़, खेत से मिलजुल कर ही बने हैं हम। इनसे जुदा होकर रहने की विवशता किसी डरावने स्वप्न के सच हो जाने जैसा होता है। मजदूर का पसीना और कवि के शब्द इस माटी पर गिरते ही प्रस्फुटित हो जाते हैं। इस अंकुरण से निर्मित होता है अस्मिता का रुपहला संसार। कविता में माटी की महक न हो तो वह बेजान बिजुका की तरह हो जाती है। झारखण्ड की चर्चित कवयित्री गुलांचो कुमारी की रचनाओं में माटी का सौंधापन भी है और प्रतिरोध की मुखर आहट भी।

इस कविता संग्रह में गुलांचो कुमारी की 44 कविताओं को संकलित किया गया। यह काव्य संग्रह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके हरेक पन्ने में झारखंडी जन-जीवन की झलक और संस्कृति की सशक्त मौजूदगी देखने को मिलती है। भाषा, इतिहास और सभ्यता के साथ होते चले आ रहे दमन और अतिक्रमण के विरुद्ध प्रत्यक्ष आक्रोश और मुखर प्रतिरोध कवयित्री की लेखनी को जीवंत और सार्थक बना देते हैं।

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