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Swatantra Prakashan Pvt. Ltd.

IKKIS MAYEE by Sushil Swatantra - PAPERBACK

IKKIS MAYEE by Sushil Swatantra - PAPERBACK

SKU:ISBN - 978-93-5986-198-2

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समय की नदी में बहते हुए, एक दिन कथा-चित्र से बाहर निकलकर शब्द चुप्पी की गहराई से जन्म लेते हैं और अपने अर्थ की खोज में बह निकलते हैं। सुशील स्वतंत्र की 'इक्कीस मई' में यही प्रवाह, रेखाचित्र की कूची के साथ अपनी शब्द-यात्रा से पूरे समाज, पूरे भूगोल और इतिहास को जीवंत कर देता है। दादी की ममता, माँ का अनुशासन, पिता की संघर्षशीलता, कोयलांचल की धूल और दैत्याकार पहाड़ों का आश्रय; सब मिलकर एक ऐसा ताना-बाना गढ़ते हैं, जिसमें जीवन की जिजीविषा हर कोने से झिलमिलाती है।

यह रचना श्रमजीवी जीवन का दस्तावेज़ भी है। खदानों की धूल, मज़दूरों की दिनचर्या, झुग्गियों की संकरी गलियाँ, उनके भीतर पनपती संस्कृति; सब कुछ बिना नारेबाज़ी, मानवीय गरिमा और करुणा के साथ। पुराने पुल पर साइकिल की धीमी यात्रा, दामोदर नदी की पथरीली धाराएँ, बच्चों की उत्सुक नज़रें ...हर दृश्य पाठक को मात्र देखने/पढ़ने नहीं, महसूस कर और भीतर उतर जाने पर मज़बूर करता है।

पुस्तक में ग़ुलाब की पंखुड़ी या पिता का अंतिम क्षण सिर्फ़ स्मृति नहीं बनते; वह संवेदनाओं के मौन संरक्षक बन जाते हैं। हार और जीत, प्रेम और करुणा, धन और ग़रीबी ...यह सब किसी गणित या हिसाब में नहीं बाँधा जा सकता। हर अनुभूति, हर दृश्य भीतर फैलती हल्की रौशनी की तरह जीवन में सुगंध घोलते हैं।

शब्द और चुप्पी का यह संवाद पुस्तक का गहन आयाम है। शब्द जहाँ सृजन और विसर्जन का माध्यम हैं, वहीं चुप्पियाँ उनका गर्भ और अंतिम विश्राम स्थल। जीवन की शुरुआत और अंत दोनों मौन में; हर शब्द, हर स्मृति उस मौन की गूँज बनकर हमारे भीतर जीवित रहती है।

सुशील स्वतंत्र की शैली वर्णनात्मक होते हुए भी काव्यात्मक है। सूरज की लालिमा, पथरीली नदी, झुग्गियों की गलियाँ सभी छोटे-छोटे दृश्य बड़े अर्थ रचते हैं। 'इक्कीस मई' महज पढ़ने की क़िताब नहीं; अनुभव करने, समय और स्मृति के बहते पानी में उतरने और जीवन के जादुई ताने-बाने में घुलने की यात्रा है।

यह पुस्तक वह पुल है; जो अतीत और वर्तमान को जोड़ता है, वह नदी है; जो समय के ग्लेशियर से पिघलती है, वह मौन है; जिसमें शब्द जन्म लेते हैं और लौटते हैं। इसे पढ़ते हुए आप जीवन-दर्शन के साक्षी ही नहीं, स्मृति और संवेदनाओं के जादुई प्रवाह में सहभागी बन जाते हैं। जीवन के बहते पानी और समय की नदी में हमारे क़दमों का प्रतिबिंब दिखाती यह पुस्तक, हर अनुभव और स्पंदित क्षणों के छायाचित्र को हमारे भीतर जीवित कर देती है।

कथेतर गद्य की विशिष्ट विधा 'रेखाचित्र' की यह पुस्तक स्वतंत्र प्रकाशन समूह की लाइफ स्केच शृंखला का हिस्सा है। इस शृंखला की सभी 9 पुस्तकों के सेट को खरीदने के लिए नीचे दी गई तस्वीर पर क्लिक करें। 
 

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