Swatantra Prakashan Pvt. Ltd.
Jazbaat by Kumar Uday 'Raaz'
Jazbaat by Kumar Uday 'Raaz'
SKU:ISBN - 978-93-5986-530-0

कुमार उदय 'राज़' के रचना संसार में जहाँ एक ओर प्रेम के कोमल-नाज़ुक रुई के फाहे हैं, तो दूसरी तरफ़ प्रतिरोध के जलते अंगारे भी हैं। एक ओर वस्ल का चरम है तो दूसरी ओर हिज़्र की गहरी खाई है। उनकी रचना में प्रेम और विछोह के दरमियान घटित होने वाला रुपहला संसार भी है और सत्ता की सनक से टकराता मुखर स्वर भी। बदलाव की अनुगूँज बार-बार उनके लेखन में प्रतिध्वनित होती है। उनकी रचनाओं से गुजरते हुए यह स्वाभावित विस्मय होता है कि ये रचनाएँ आख़िर इतनी देर से पाठकों के समक्ष क्यों आ रही हैं! वर्षों पहले ही सृजनात्मकता के आसमान पर इन रचनाओं को गुंजायमान हो जाना चाहिए था।
एक रचनाकार क़लम का सजग सिपाही होता है। जब चारो ओर चित्कार हो, मदद की पुकार हो, भूख का तांडव हो, तो कोई रचनाकार बंद कमरे में बैठकर शृंगार रस की कविता नहीं लिख सकता है। उसकी क़लम वही रचेगी जो वक़्त की पुकार होगी। रचना किसी लेखक की मिल्कियत नहीं होती है, बल्कि वह उस समय की होती है, जिसमें उसे रचा जा रहा होता है। कुमार उदय ‘राज़’ की रचनाएँ भी अपने समय का आईना हैं। वे बेबाक हैं, मारक हैं और उन्हें मौकापरस्ती कतई नहीं आती है।
यह पुस्तक दो खण्डों में विभाजित है। पहला खण्ड ग़ज़लों का है और दूसरा कविताओं/गीतों/दोहों/मुक्तकों का।
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