Swatantra Prakashan Pvt. Ltd.
Kanon Dekhi by Prabhat Goswami
Kanon Dekhi by Prabhat Goswami
SKU:ISBN - 9789359869452

ख्यातिप्राप्त व्यंग्यकार प्रभात गोस्वामी ने अपनी इस पुस्तक के माध्यम से व्यंग्य जगत में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज़ करवाई है। आजकल जब कभी कोई घटना किसी के आँखों के आगे घटित होती है; लोग उसकी अनदेखी करते हैं। आप पूछो तो साफ मुकर जाते हैं कि उनकी आँखों के आगे ऐसा कुछ हुआ ही नहीं! दूसरी ओर एक वर्ग ऐसा भी पनप चुका है जो आँखों की जगह सिर्फ कानों से देख रहा है। बंद आँखों से सपना तो दिखाई देता है, पर खुली आँखों से देखने पर सच्चाई भी दिखाई नहीं देती। यह भी विडम्बना है कि कान अब आँख हो गए हैं! आँखों में तो मोतियाबिंद या रतौंधी से दिखाई कम पड़ने लगता है। लेकिन कानों में मैल जमने के बाद भी सब कुछ साफ-साफ दिखाई पड़ता है। क्या करें, अब आँखों से अनदेखी करने और कानों से देखने का दौर जो चल पड़ा है। वैसे ऐसे लोगों का यह मानना है कि आँखों से देखने के कई नुकसान हैं, कानों से देखने पर सुकून मिलता है। आँखों को आराम भी मिलता है। अब यह निर्णय आप पर निर्भर करता है कि क्या आप आँखों से अनदेखी करते हुए कानों से देखना चाहेंगे?
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