Swatantra Prakashan Pvt. Ltd.
Kavita Mahaz Aag Nahin Hoti by Satyadeep
Kavita Mahaz Aag Nahin Hoti by Satyadeep
SKU:ISBN - 978-93-5986-591-1

कविता में आग पैदा करने की ताक़त तो होती है, मगर ये भी सच है कि कविता महज़ आग नहीं होती। सत्यदीप जी के इस काव्य संग्रह से गुजरकर पाठकों को अवश्य ही यह एहसास होगा कि कविता कड़ी धूप में मिल जाने वाली दरख़्त की छाँव की मानिंद शीतल होती है। मानो राहगीर के लिए कोई पनाहगाह हो। विविधरंगी कविताओं के माध्यम से सत्यदीप जी ने जो रचना संसार रचा है, वह अद्भुत है। मानव मन और विशेषकर आमजन के दुःख-दर्द और भावनाओं के इर्द-गिर्द रहकर लिखी गई सत्यदीप जी की यह दसवीं प्रकाशित कृति है। 59 कविताओं की इस पुस्तक का चयन स्वतंत्र प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा घोषित ‘नि:शुल्क पुस्तक प्रकाशन योजना:2023-2024’ के तहत किया गया है।
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