Swatantra Prakashan Pvt. Ltd.
Parkata Parinda by Guddu Anil
Parkata Parinda by Guddu Anil
SKU:ISBN - 978-93-5986-029-9
परकटा परिंदा काव्य संग्रह 59 कविताओं, 6 मुक्तकों और 6 भक्ति रस की रचनाओं का गुलदस्ता है। पुस्तक में संकलित रचनाओं को गुजरते हुए यह स्पष्ट आभास होता है कि सारी रचनाएँ एक के बाद एक कवि मन की गहराईयों से बेबाकी और ईमानदार अभिव्यक्ति का चोला ओढ़े चली आ रही हैं।
कोयला क्षेत्र में कार्यरत रहते हुए भी गुड्डू अनिल जी की साहित्य के प्रति इतनी गहरी प्रतिबद्धता और रचनाशीलता विस्मित करती है। कवि के लेखन की विशेषता है कि वे किसी सजावटी लच्छेदार बिंबों के जाल को न बुनकर सपाट बयानी के माध्यम से अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करने में यकीन रखते हैं। कविता का पारंपरिक स्वरूप हमेशा से अलंकरण, छंद, बिंब और प्रतीकों से समृद्ध रहा है किंतु समय के साथ साहित्यिक अभिव्यक्ति के रूप भी बदले हैं। आज की कविता केवल सौंदर्य की नहीं, बल्कि सत्य की वाहक बन चुकी है। एक ऐसा सत्य जो सपाट, सीधा और नग्न रूप में सामने आता है। सपाट कविता नाटकीयता और सजावटी भाषा से दूर रहती है। इसमें न तो जटिल प्रतीकों का जाल होता है, न ही बिम्बों की बहुलता बल्कि ये कविताएँ साधारण भाषा में असाधारण भाव व्यक्त करने की क्षमता रखती है। ये कविताएँ पाठक को चौंकाने के लिए नहीं, जगाने के लिए लिखी जाती हैं। अभिव्यक्ति की इसी विशिष्ट शैली के महारथी हैं गुड्डू अनिल जी।

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